सनातन धर्म के मूलभूत सिद्धांतों से लेकर
सबसे उन्नत वैदिक साधनाओं तक सीखें
जो कि सीधे शास्त्रों से ग्रहण की गई हैं


20+ वर्षों का शास्त्रीय अनुसंधान
प्रामाणिक सनातन ग्रंथों से व्युत्पन्न साधनाएँ
साधारण आध्यात्मिक जिज्ञासा के लिए उपयुक्त नहीं
यहाँ प्रस्तुत किए गए इस प्रकार के अनुसंधान में हम अग्रणी (पायनियर) हैं।

प्रामाणिक, शोध-आधारित सनातन हिंदू साधनाओं तक पहुँच अधूरे ज्ञान और इंटरनेट पर फैले विकृतिकरण से संरक्षण
एक संपूर्ण प्रणाली (बिखरे हुए अनुष्ठान नहीं)

महत्वपूर्ण पृष्ठ लिंक

सनातन धर्म में प्रवेश द्वार

आत्म बोध: आंतरिक स्पष्टता के लिये निशुल्क वैदिक आत्म ज्ञान

वैदिक मार्ग – वैदिक क्रियाओं का संपूर्ण पथ

गुरू शिष्य परम्परा

गुरु दीक्षा एवं वैदिक साधन

ज्योतिष विद्या एवं भाग्य – ज्योतिष और भाग्य का विज्ञान

बुद्धि एवं चित्त – मानव बुद्धि का वैदिक विज्ञान

गौ महत्त्व – बौद्धिक विकास में गो-दुग्ध की भूमिका

कुण्डलिनी जागरण – वैदिक मार्ग में मुक्ति का साधन

ध्यान विधि – मानसिक सन्तुलन का वैदिक साधन

संस्कृत भाषा – ब्रह्मांड की भाषा

वर्ण जाति व्यवस्था – बुद्धि का वैज्ञानिक ढाँचा

धर्म तत्त्व – प्राचीन सनातन शिक्षाओं के अनुसार धर्म

योग एवं प्राणायाम – मानव जीवन और वैदिक साधना की आधारशिला

सनातन धर्म एवं बौद्ध दर्शन – उत्पत्ति और समानता

यम एवं नियम

सनातन धर्म के मूल स्तम्भ

नीचे प्रस्तुत सामग्री सनातन धर्म का एक संक्षिप्त किंतु समग्र सार है, जिसे अनेक प्राचीन हिंदू ग्रंथों से संकलित किया गया है।
ये मूल सिद्धांत वैदिक शास्त्रों के गहन अध्ययन और साधना के माध्यम से सुव्यवस्थित रूप से व्युत्पन्न किए गए हैं।
इन सभी बिंदुओं की विस्तृत व्याख्या Self Realization Simplified (SRS) नामक यूट्यूब वीडियो श्रृंखला में की गई है।
संबंधित वीडियो के प्रत्यक्ष लिंक इस वेबसाईट पर आपकी सुविधा हेतु दिए गए हैं।
यहाँ क्लिक करें
यह संक्षिप्त ढांचा सनातन धर्म की संपूर्ण वैज्ञानिक और दार्शनिक प्रणाली को समझने के लिए एक सुव्यवस्थित प्रवेश द्वार है।

सनातन धर्म के मूल सिद्धांत

१. समस्त भौतिक तथा अभौतिक जगत की उत्पत्ति बुद्धि के क्षेत्र (Field of Intelligence) से हुई है।

२. यह बुद्धि का क्षेत्र ब्रह्म का ही एक अभिन्न अंग है।

३. अब यह तथ्य स्विट्ज़रलैंड स्थित CERN प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि समस्त भौतिक पदार्थ एक ऐसे सार्वभौमिक क्षेत्र से उत्पन्न अथवा उद्भूत होता है जिसका न कोई प्रारंभ है और न कोई अंत।

४. क्या यह खोज वास्तव में ब्रह्म की ही खोज है?

५. ब्रह्म वह सार्वभौमिक क्षेत्र है जो केवल भौतिक पदार्थ ही उत्पन्न नहीं करता, अपितु समस्त जीवों को चेतना और बुद्धि भी प्रदान करता है। हिंदू ग्रंथ ब्रह्म का वर्णन पश्चिमी विज्ञान द्वारा परिभाषित सार्वभौमिक क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत रूप में करते हैं।

६. श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि यद्यपि ब्रह्म उनका निर्गुण (निराकार) स्वरूप है, तथापि वे स्वयं सगुण (साकार) रूप में भी विद्यमान हैं।

७. गीता में इसे स्वयं उन्होंने “राजविद्या” कहा है।

८. जब वे ब्रह्म के रूप में निराकार अवस्था (अद्वैत स्वरूप) में होते हैं, तब सृष्टि की रचना के समय, व्याख्या के उद्देश्य से, ब्रह्म द्वैत का आश्रय लेता है। यह द्वैत स्वरूप ही चेतना का क्षेत्र (Field of Consciousness) है।

९. यह चेतना का क्षेत्र ही देवी महालक्ष्मी अथवा माता राधा है।

१०. देवी महालक्ष्मी भौतिक सृष्टि के संचालन हेतु अपने तीन स्वरूप धारण करती हैं—महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती।

११. इस प्रकार जहाँ श्रीकृष्ण समस्त जीवों को भौतिक शरीर प्रदान करते हैं, वहीं देवी महालक्ष्मी अपने तीन स्वरूपों के माध्यम से समस्त जीवों को चेतना और बुद्धि प्रदान करती हैं।

१२. भगवान श्रीकृष्ण यहाँ तक कहते हैं कि उनका स्वयं का साकार स्वरूप भी देवी के कारण ही चेतना प्राप्त करता है।

१३. अतः ये दोनों राधा एवं कृष्ण एक-दूसरे से अविभाज्य हैं।

उपरोक्त विवेचन ही समस्त वेदांत, अद्वैत एवं द्वैत सिद्धांतों, उपनिषदों तथा संपूर्ण हिंदू दर्शन का सार (Crux) है।

क्यूँकि सार्वभौमिक क्षेत्र के अस्तित्व को अब वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया जा चुका है, इसलिए यह सत्य निर्विवाद रूप से स्थापित होता है कि जो भारतीय हिन्दु ग्रंथों में ब्रह्म बताया गया है उसका वास्तविक आस्तित्व निश्चय रूप् से है।

इसी ब्रह्म क्षेत्र को हिंदू ग्रंथों में परमेश्वर (God Almighty) कहा गया है।

अतः ईश्वर के अस्तित्व का सत्य एक अकाट्य तथ्य के रूप में स्थापित होता है।

सृष्टि की उत्पत्ति तथा पृथ्वी पर समस्त जीवन के संचालन से संबंधित इन तथ्यों एवं अन्य गहन सत्यों का अध्ययन आप SRS 1 से SRS 42 तक की यूट्यूब वीडियो श्रृंखला में कर सकते हैं, जहाँ अनेक शास्त्रों के विस्तृत संदर्भों के साथ इन विषयों को समझाया गया है।

संबंधित वीडियो के लिंक नीचे दिए गए हैं।

सनातन धर्म क्या नहीं है

 सनातन धर्म कोई आस्था-आधारित
विश्वास प्रणाली नहीं है
सनातन धर्म है—


• सम्पूर्ण जीव अस्तित्व को समझने के लिए एक वैज्ञानिक ढाँचा।
• वैदिक ज्ञान में निहित, अंधविश्वास में नहीं।
• अनुष्ठानों के लिए नहीं, अपितु व्यवस्थित रूपांतरण के लिए निर्मित।
• जिसमें तैयारी, अनुशासन और मार्गदर्शन अनिवार्य हैं।

सनातन धर्म क्या नहीं है


सनातन धर्म धन के लिए ईश्वर से भीख माँगने के विषय में नहीं है।

सनातन धर्म देवताओं के चित्र एकत्र करके उनसे अपने स्वार्थ के लिए वरदान माँगने के विषय में नहीं है।

सनातन धर्म केवल कर्मकांडों के पालन के विषय में नहीं है।

केवल तीव्र प्रार्थना करने से ईश्वर स्वर्ग से उतरकर आपकी जटिल समस्याएँ सुलझाने नहीं आएँगे। यह आपको उच्चतम बुद्धि के द्वारा स्वयं ही सुलझानी होंगी।

सनातन धर्म क्या है

सबसे पहले, यह कुछ निश्चित सिद्धांतों का पालन करने के विषय में है, जिनके माध्यम से आप स्वयं को एक सच्चा मानव बनाते हैं।

मूल सिद्धांत
मनुष्य रूप में जन्म लेकर पहले आपको मनुष्य बनना आवश्यक है।

इसके पश्चात ही आप सनातन वैदिक प्रक्रियाओं को करने के
योग्य व अधिकारी बनते हैं।

वैदिक प्रक्रियायें क्या हैं?

योग एवं प्राणायाम के माध्यम से प्राण शक्ति पर नियंत्रण विकसित करना।

ध्यान के माध्यम से अपनी बुद्धि पर नियंत्रण विकसित करना।

साधनाओं के माध्यम से अपने भविष्य पर नियंत्रण विकसित करना।

यही सनातन धर्म का सार है।

सनातन वैदिक मार्ग में प्रवेश समझने के लिये निम्न बटन पर क्लिक करें

सनातन धर्म का ज्ञान
एक तार्किक, वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित पद्धति में

सनातन धर्म का ज्ञान
एक सुव्यवस्थित माध्यम द्वारा
पिछले ८०० से भी अधिक वर्षों से
सामान्य जनमानस के समक्ष
प्रस्तुत नहीं किया गया है।

आज विश्व का सामान्य जनमानस मानसिक रूप से अत्यधिक विचलित है।

उसका मन निरन्तर डगमगाता रहता है।

समाज का दबाव, साथियों का दबाव, आर्थिक अस्थिरता, भविष्य की अनिश्चितता, भय — ऐसे अनेक कारक मनुष्य को भीतर से अस्थिर रखते हैं।

आज इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सनातन हिन्दू दर्शन, विज्ञान और साधनाओं से जुड़ी अपार मात्रा में सामग्री उपलब्ध है।

अनेक संस्थाएँ, वेबसाइटें और गुरु इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं।

तो फिर, जब इतना सब उपलब्ध है— तब एक और संस्था, एक और वेबसाइट, या एक और सामग्री की आवश्यकता क्यों है?

इसी प्रश्न का उत्तर umakailash.org को इंटरनेट पर उपलब्ध अन्य सामान्य सामग्री से पूर्णतया भिन्न और अद्वितीय बनाता है।

सनातन दर्शन और ज्ञान से संबंधित वास्तविकताएँ

• इंटरनेट पर उपलब्ध सनातन दर्शन, विज्ञान और साधनाओं से जुड़ी समस्त सामग्री टुकड़ों में बिखरी हुई है।
• अनेक विद्वान उन्नत विषयों पर प्रवचन दे रहे हैं, पर ये विषय वास्तविक जीवन से कैसे जुड़ते हैं, यह कोई नहीं बताता। परिणामस्वरूप, श्रोता सनातन ज्ञान को अपने जीवन से जोड़ नहीं पाते।
• जनमानस को केवल विस्तृत दार्शनिक बातें बताई जा रही हैं — उनके जीवन में व्यावहारिक प्रभाव क्या होंगे, यह कोई स्पष्ट नहीं करता।
• आज उपलब्ध विस्तृत और उन्नत सनातन विषय किस प्रकार अन्य विषयों से जुड़े है और इसे समेकित रूप में कैसे समझा जाना चाहिए, यह कोई विद्वान नहीं बताता।
• सनातन ज्ञान के मौलिक, मूलभूत सिद्धांतों को समझाने वाली एक भी वेबसाइट उपलब्ध नहीं है।
• इतने विद्वानों के उपलब्ध होते हुये भी— क्या ईश्वर का आस्तित्व वास्तविक रूप में है? अथवा नहीं यह कोई नहीं बता रहा। ईश्वर हर समय कैसे हमारे चारों ओर है? वह ब्रह्माण्ड के हर कण में कैसे विद्यमान है? ऐसे मूलभूत प्रश्नों का उत्तर कोई नहीं देता।
• “एक परम पुरुष परमात्मा” का अस्तित्व क्या है? यह विषय वर्तमान समय में भी लगभग सभी के मन में संदेह का विषय बना हुआ है।
• बड़े-बड़े आचार्य और संगठनों के प्रमुख भी अनेक मूलभूत प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर नहीं दे पाते।
• वर्तमान गुरुओं के प्रवचन शास्त्र-सम्मत हो सकते हैं, पर शास्त्रों का ज्ञान वास्तविक जीवन में कैसे उपयोग में लाया जाए, यह कोई नहीं सिखाता।

हिन्दू साधनाओं और अनुष्ठानों से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्य

• यहाँ भी वही समस्या है— सारी जानकारी टुकड़ों में बिखरी हुई है।
• लोग अनुष्ठान कर तो रहे हैं, पर मूल सिद्धांतों और उद्देश्य को समझे बिना। परिणामस्वरूप — अधिकांश अनुष्ठान अंधी, अप्रभावी क्रियाएँ बन कर रह गये हैं, जिनसे कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता।
• मूल सिद्धांतों को न जानकर लोग चमत्कार दिखाने वाले बाबाओं के पीछे भाग रहे हैं।
• औसत व्यक्ति समस्याओं के शॉर्टकट ढूँढते-ढूँढते भ्रमित और भटका हुआ रहता है।
• एक भी विद्वान ऐसा नहीं है जो सनातन हिन्दू दर्शन के मूल तत्त्वों को स्पष्ट रूप से समझा रहा हो।
• एक भी बाबा ऐसा नहीं है जो जीवन को श्रेष्ठ, उन्नत, समृद्ध और पूर्ण बनाने का एक सटीक मार्ग बता रहा हो।
• आम जनमानस को आज भी वह स्पष्ट मार्ग नहीं मिला जिसे अपनाकर वह अपना जीवन सुधार सके— क्योंकि कोई गुरु इस मार्ग का वर्णन ही नहीं कर रहा।
• उन्नत साधनाएँ ऐसे बेची जा रही हैं मानो वे किसी दवा की गोली के समान तुरन्त समाधान दे दें— पर मूलभूत ज्ञान जाने बिना उन्नत साधनाएँ प्रभावहीन हो जाती हैं।
• इतने गुरुओं और सामग्री के उपलब्ध होते हुये भी सामान्य व्यक्ति जीवन की समस्याओं के सामने आज भी धराशायी हो जाता है।

जिस प्रकार आप डॉक्टर, इंजीनियर या किसी भी व्यवसाय के विशेषज्ञ - नर्सरी, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय से होकर पूर्ण शिक्षा प्राप्त कर के ही बनते हैं— ठीक वही सिद्धांत जीवन पर भी लागू होता है।

जीवन की समस्याएँ आप तब तक नहीं सुलझा सकते, जब तक आप जीवन के मूल सिद्धांतों को नहीं जानते, साधनाओं तपस्याओं के मूलभूत चरणों और ज्ञान के आधारभूत ढांचे को न समझ लें।

जीवन के क ख ग समझे बिना जीवन की समस्याएँ हल करना ऐसा ही है जैसे विज्ञान और इंजीनियरिंग सीखे बिना रॉकेट लॉन्च के विषय में सोचना।

उमा कैलाश फ़ाउंडेशन — इस अंतर को भरने के लिए २०२१ में स्थापित की गयी थी

जिस प्रकार किसी व्यावसाय में आप समय और धन का निवेश करते हैं तब ही आपको आपेक्षित लाभ मिलता है उसी प्रकार जीवन को समझने और सुधारने के लिए आपको समय और थोड़ा धन निवेश करना ही पड़ेगा।

जिस प्रकार यदि आपको कोई बीमारी है, तो आपको अपने लिए दवा स्वयं ही लेनी होगी। कोई अन्य व्यक्ति आपके स्थान पर दवा खाकर आपको ठीक नहीं कर सकता।

ठीक इसी प्रकार— आपके जीवन की समस्याएँ भी आपको ही हल करनी होंगी। कोई अन्य व्यक्ति आपके स्थान पर यह काम नहीं कर सकता

जीवन में समस्याएँ कब उत्पन्न होंगी, यह कोई नहीं जानता। इसलिए जैसे व्यावसाय में आगे की परिस्थितियों का अनुमान कर आप कदम उठाते हैं— उसी प्रकार जीवन में भी समस्याएँ आने से पहले सही कदम उठाने आवश्यक हैं।

उमा कैलाश फ़ाउंडेशन आपके लिए क्या लेकर आता है

• समस्त वैदिक ज्ञान और दर्शन के मूल सिद्धांत, सरल भाषा में
• सनातन हिन्दू दर्शन और ज्ञान के मुख्य तत्त्व
• ये तत्त्व आपके वास्तविक जीवन से कैसे जुड़े हैं
• सनातन वैदिक प्रक्रियओं व साधनाओं के मूलभूत सिद्धांत
• आपके जीवन में कौन-से सटीक कदम उठाने आवश्यक हैं जिस से उच्चतर ज्ञान और साधनाएँ प्रभावी हों
• स्थिरता, प्रसन्नता, समृद्धि और पूर्णता प्राप्त करने के लिए कौन-से जीवन-सिद्धांत अपनाने आवश्यक हैं
• कौन-सी मूल साधनाएँ अनिवार्य हैं जिनके बिना उन्नत साधनाएँ सफल नहीं होंगी
• जैसे स्कूल में विज्ञान के सरल प्रयोग करने के बाद आप उच्चतर विज्ञान समझ पाते हैं— वैसे ही वैदिक साधनाओं में आपको मूल अभ्यासों से प्रारम्भ कर धीरे-धीरे उन्नत साधनाओं की ओर बढ़ना होता है
• स्तोत्र, मंत्र, यंत्र, साधनाओं के मूल सिद्धांत क्या हैं? और वे कौन-से विशिष्ट परिणाम दिला सकते हैं
• हम सैकड़ों वैदिक साधनाओं की जानकारी उपलब्ध कराएँगे

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उमा कैलाश फाउंडेशन

सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों से लेकर अत्यन्त उन्नत वैदिक साधनाओं तक का सर्वांगपूर्ण विवरण

  एकमात्र संस्थान जो सनातन धर्म को एक पूर्ण, वैज्ञानिक एवं सत्यापनीय प्रणाली के रूप में प्रस्तुत करता है।

सृष्टि, चेतना और बुद्धि की उत्पत्ति से लेकर जीवन को शक्तिशाली तथा उच्चकोटि का बनाने वाली सर्वोच्च वैदिक साधनाओं तक।

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यह उन साधकों के लिए आदर्श है जो सामान्य मानसिकता से ऊपर उठकर मानव अस्तित्व की वास्तविक वैज्ञानिक संरचना को समझना चाहते हैं।

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